बाल मित्र ……. और चंचलता
चंचल शब्द से सर्वप्रथम नरेन्द्र चंचल का ख्याल ज़ेहन में आता है
उनके भजन की कड़ी आपके समक्ष पेश है….. जय माता दी!!!
अगले पल दूरदर्शन के धारावाहिक का शीर्षक गीत याद आता है, धारावाहिक चरित्रहीन,
हालांकि इस गीत में चंचल शब्द का उपयोग नहीं है फिर भी, उसकी कड़ी पेश है
तीसरा ख़याल आता है चंचल मित्तल का, ये बात और है कि उनकी कोई कड़ी उपलब्ध नहीं है, वो तो पाठशाला में सहपाठी थी, पर कहानी की नीव यही है …. चंचलता ….
अभी कुछ दिन पहले की बात है, मैं अपने पुराने बाल मित्रो से मिला !
हमने काफी समय साथ में बिताया है, काफी अच्छा और थोडा बुरा भी!
अगर गाम्भिर्यता की बात करें तो गंभीरता से हमने कभी बात की ही नही…
हम सभी के स्वभाव में कई प्रकार की चंचलताये थी
परन्तु हमारी इस मुलाक़ात में मैंने महसूस किया की हमारी चंचलता,
अब विशिष्ट गाम्भिर्यता में परिवर्तित हो गयी है
बचपन में जो जेब खर्ची थी वो अब अर्थ की कहानी हो गई है और मजे की बात ये है ईसी ये ऐहसास होता की क्षितिज कितना
बदल और बढ गया है
बदल और बढ गया है
रिश्तो की बात करॆ तो एक पीढ़ी
छलांग कहना बहुत अविश्वसनिय नही होगा पर अपनी अगली पीढ़ी की चर्चा यकिनन उसी
क्षितिज को नये क्षितिज पर ले गयी
छलांग कहना बहुत अविश्वसनिय नही होगा पर अपनी अगली पीढ़ी की चर्चा यकिनन उसी
क्षितिज को नये क्षितिज पर ले गयी
पाठशाला के बाद, कई प्रकार
के खेल खेलने वाले हम बालक
के खेल खेलने वाले हम बालक
अब जीवन के खेल, खेल रहे है
!!
!!
ईसी मुलाकात मे मैने महसूस
किया की बाल मित्रो को आप कितने भी अन्तराल के बाद मिले आपके रिश्ते में कोई फऱक नही
पडता है, आप पिछली मुलाकात से ही शुरु करते हैं, वक्त गुजर चुका होता है पर चंचलता
का दर्जा वही होता है …
किया की बाल मित्रो को आप कितने भी अन्तराल के बाद मिले आपके रिश्ते में कोई फऱक नही
पडता है, आप पिछली मुलाकात से ही शुरु करते हैं, वक्त गुजर चुका होता है पर चंचलता
का दर्जा वही होता है …
और आपको किसी भी कड़ी की जरूरत नही पडती है
जिंदगी को आसान
करने की संदर्शिका,
करने की संदर्शिका,
बाल मित्र और चंचलता की पुस्तिका





